सुरभि सेवा
गौसेवा संदेश

गौसेवा संदेश

गौमाता पर शास्त्रों और संतों के वचन

गोशाला में गौ माता को गले लगाता युवक: माँ है, शब्दों से नहीं, आँखों से बोलती है।
नदी किनारे बाल कृष्ण और बछड़ा: गाय और परमात्मा दोनों एक समान।
वन में बछड़े को गले लगाते श्रीकृष्ण: कलियुग तरण उपाय न कोई।
गाय और बछड़े के सामने हाथ जोड़े बैठी देवी: तां धेनुं शिरसा वन्दे भूतभव्यस्य मातरम्।
आभूषणों से सजी गाय और बछड़ा जल पीते हुए: सुरभि हैं परमेश्वर, कि शुद्ध रूप पर्याय।
बछड़े के सिर पर हाथ रखे बाल कृष्ण: सर्व शक्तिमान का अर्चन करता शौर्य प्रदान।
सजी गाय और बछड़े को घास खिलाते भगवान शिव: निज धन जे गोत्रास बनावे।
दूध से बाल कृष्ण को नहलाती माता, पास में गाय: हदयेश्वर वत गाय हैं, शान्त सौम्य गंभीर।
सोने के सिक्कों के पास सजी गाय और बछड़ा: जिस तरह भगवान हैं, श्री - श्री से सम्पन्न।
बछड़ा गोद में लिए गाय के साथ दौड़ते बाल कृष्ण: दुग्धपान करि कृष्ण तुम्हारा।
बैठी गाय के सामने दूध, दही, घी, गोमूत्र, गोबर के कटोरे: नाना औषध हैं जग माहीं।
गाय और बछड़े के साथ बैठे भगवान शिव: कामधेनु सर्वेश्वर में तनिक नहीं है भेद।
पत्ते की छतरी थामे बाल कृष्ण और बछड़ा: गो द्विज धेनु देव हितकारी।
पहाड़ों के बीच घास पर बैठी गाय और बछड़ा: मातरः सर्वभूतानां गावः सर्वसुखप्रदाः।
फूलों के मैदान में गाय के साथ नृत्य करते श्रीकृष्ण: भूकंप कहे गाय की गाथा।
गायों के झुंड में गाय को गले लगाते श्रीकृष्ण: गीता में श्रीकृष्ण कहते हैं, गायों में मैं कामधेनु हूँ।
शरीर पर देवी देवताओं के चित्र वाली गाय: सर्वे देवाः स्थिताः देहे सर्वदेवमयी हि गौः।
शिवलिंग के पास सजी गाय और बछड़ा: गावो विश्वस्य मातरः।
गाय का दूध दुहती महिला और घास लाती बच्ची: होऊ रुज मधुमेह बरु कर्का।
गाय और बछड़े के साथ बैठे बाल कृष्ण: प्रभु हमारे हम सबको करते वात्सल्य प्रदान।
समुद्र मंथन की लहरों से प्रकट होती गाय: समुद्र-मंथन से प्रकट हुई दिव्य सुरभि गो।
गाँव में गाय को हरी घास खिलाता व्यक्ति: यत्पुण्यं सर्वयज्ञेषु दीक्षायां च लभेन्नरः।
शरीर में देवी देवताओं वाली गाय और बछड़ा: सर्वदेवमयी देवी सर्वदेवैरलंकृते।