
चित्र: सुरभि सेवा, हिंदी पाठक संस्करण का आवरण
कांकरेज गोवंश
बनासकांठा और मेहसाणा, गुजरात; राजस्थान का सीमावर्ती क्षेत्र
कांकरेज गाय गुजरात के बनासकांठा और मेहसाणा की द्विकाजी (दूध और काम दोनों) नस्ल है। पहचान: बड़े वीणा-आकार के सींग, चांदी जैसा धूसर रंग, और औसत दूध प्रति ब्यांत 1,300 से 1,800 किलो।
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| नस्ल | कांकरेज |
|---|---|
| क्षेत्र | बनासकांठा और मेहसाणा, गुजरात; राजस्थान का सीमावर्ती क्षेत्र |
| प्रकार | द्विकाजी |
| मूल स्रोत | बॉम्बे प्रेसीडेंसी के भारतीय गोवंश |
| लेखक | के. ह्यूलेट |
| प्रकाशन वर्ष | 1912 |
| संस्करण | हिंदी पाठक संस्करण |
| पुस्तिका पृष्ठ | 13 |
संक्षिप्त परिचय
बड़े वीणा-आकार के सींग, चांदी जैसा धूसर रंग और खास चाल। भारत की सबसे भारी देशी नस्लों में से एक।
पहचान
रंग चांदी जैसा धूसर से लोहे जैसा काला। सींग बड़े, वीणा के आकार के, ऊपर और बाहर की ओर। चाल में सिर ऊँचा और पैर एक साथ उठते हैं, जिसे “सवाई चाल” कहते हैं।
उत्पत्ति
गुजरात का कांकरेज क्षेत्र, बनास और सरस्वती नदियों के बीच। ब्राज़ील में इसे “गुज़ेरा” नाम से पाला जाता है।
विशेषताएँ
- बैल तेज़ और शक्तिशाली, खेती और ढुलाई के लिए
- प्रति ब्यांत औसत 1,300 से 1,800 किलो दूध
- गर्मी और सूखे के प्रति सहनशील
स्रोत: NBAGR नस्ल विवरण पंजी।
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स्रोत एवं संदर्भ
मूल स्रोत:
Breeds of Indian Cattle, Bombay Presidency, K. Hewlett, M.R.C.V.S., 1912। पुस्तकालय में पढ़ें
आवश्यक सूचना
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